庚申講 International Project

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कोशिन-को क्या है?

(庚申講, ) जापान की एक पारंपरिक लोक-प्रथा है।

चीन में उत्पन्न ताओ धर्म के अनुसार, मनुष्य के शरीर में तीन कीड़े रहते हैं — एक सिर में, एक आंतरिक अंगों में और एक शरीर के निचले भाग में। इन तीनों को (三尸, ) कहते हैं।

माना जाता है कि ये पेट-दर्द, सिर-दर्द और अन्य रोगों का कारण बनते हैं। इतना ही नहीं, हर साठ दिन में एक बार आने वाली (庚申) की रात को ये शरीर से निकलकर स्वर्ग को जाते हैं और अपने आश्रयदाता के बुरे कर्मों की शिकायत देवता (天帝, ) से करते हैं।

, जिसे मनुष्य की आयु का अधिपति माना जाता है, की शिकायत सुनकर अपराध की गंभीरता के अनुसार उस व्यक्ति की आयु घटा देता है।

इसे रोकने के लिए लोग की रात भर जागते रहते हैं और इस बात पर नज़र रखते हैं कि शरीर से बाहर न निकल जाएँ। यही प्रथा कहलाती है।

आठवीं शताब्दी (नारा काल) में चीन से जापान पहुँची और बारहवीं शताब्दी (हेइआन काल) तक कुलीन वर्ग में खूब प्रचलित रही। सत्रहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी (एदो काल) में यह बौद्ध धर्म और शिंतो से जुड़कर आम जनता में भी लोकप्रिय हो गई। आज भी जापान के कोने-कोने में -टीले (庚申塚) और -स्तंभ (庚申塔) जैसे स्मारक बचे हुए हैं, जो उस समय की समृद्धि की गवाही देते हैं।

सानशी कहलाने वाले तीन कीड़े: जोशी, चूशी और गेशी।
तीन कीड़े () — (ऊपरी), (मध्य) और (निचला)। ताओ ग्रंथ ताइजो-जो-सानशी-चू-होसेइ-क्यो से।

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तोक्यो कोशिन-दो का पालन करने वाला और उसके पुनरुद्धार के लिए प्रयत्नशील एक समूह है।

तोक्यो कोशिन-दो (東京庚申堂)
पता: Mukoujima 3-7-4 Sumida-ku, Tokyo
www.koshindo.com